भूल का अहसास...

डॉ. शर्मा के पास सवेरे कई अध्यापक आकर अपनी अपनी तरह से घटना का बयान कर सकते थे। कल जो कुछ स्कूल में हुआ था वह इससे पहले कभी नहीं हुआ था। स्कूल ने अपने छात्रों से कह रखा था कि वे रविवार के दिन आकर स्कूल के मैदान में खूब खेल सकते हैं। बहुत से बच्चे आकर खेलते भी थे। मगर कल जो छात्र खेलने आए उन्होंने स्कूल की साइंस लैब का ताला तोड़ा। कम्प्यूटर के मॉनीटर को तोड़ दिया। माउस को जमीन पर दे मारा । एक मेज जिस पर नए बीकर और टैस्टट्यूब रखे थे, को उलट दिया। हां, बच्चों ने तोड़-फोड़ तो जरूर की थी मगर लैब से कुछ चुराया नहीं था।

भूल का अहसास...

डॉ. शर्मा को यह भी पता चल गया था कि इस तोड़-फोड़ में कौन से बच्चे शामिल थे। डॉ. शर्मा समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें। उनके कई साथी अध्यापक तो इतने गुस्से में थे कि चाहते थे उन बच्चों को स्कूल से निकाल दिया जाए। परन्तु डॉ. शर्मा नहीं चाहते थे कि ऐसा हो। अगले दिन उन्होंने उन बच्चों को अपने पास बुलाया। जब वे बच्चे डॉ. शर्मा के सामने आए तो उनके चेहरे झुके हुए थे। डॉ. शर्मा ने जब बार-बार पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो वे यही बता सके कि पता नहीं खेलते-खेलते उन्हें क्या सूझा कि लगा कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे सब लोग उनके ही बारे में बातें करें। तो अब स्कूल के नुकसान की भरपायी कैसे होगी? बच्चे सिर झुकाए खड़े रहे। शायद उन्हें अपने किए पर पछतावा हो रहा था। अगले दिन वे चारों बच्चे डॉ. शर्मा से मिलने आए। सबका कहना था कि उन्होंने अपने-अपने मम्मी-पापा से बात की है। बच्चों की इस हरकत पर उन्हें गुस्सा तो बहुत आया लेकिन उन्होंने कहा है कि वे स्कूल के नुकसान की भरपायी करेंगे। इस पर डॉ. शर्मा बहुत गम्भीर हो गए। बोले-अगर तुम्हारे मम्मी पापा ने पैसों से भरपायी कर दी तो तुम्हें तो अपनी गलती का अहसास कभी होगा ही नहीं। तो फिर क्या किया जाए? वे चारों बच्चे सोच में पड़ गए। बच्चों ने पूछा कि सर आप ही बताइए कि हम क्या करें? डॉ. शर्मा ने कहा कि अब बच्चे खुद ही तय करें कि वे कैसे प्रायश्चित कर सकते हैं ? अगले दिन छुट्टी के वक्त डॉ. शर्मा ने देखा कि चारों बच्चे एक गुल्लक लिए चले आ रहे हैं। उन्होंने डॉ. शर्मा से कहा कि वे तब तक अपना पाकेट मनी इस गुल्लक में डालते रहेंगे जब तक पैसे पूरे नहीं हो जाते । इसके लिए वे अपने मम्मी पापा से ज्यादा पैसे भी नहीं मांगेंगे। डॉ. शर्मा को लगा कि इस एक संकल्प ने जैसे बच्चों के चेहरे पर एक नयी चमक ला दी है।

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