ऐसे राजा की कथा, जिसने भोग विलास में समय बिताने के बजाय भविष्य की चिंता की. एक राज्य में अनोखी प्रथा प्रचलित थी वहा एक राजा शिर्फ़ एक साल राज कर सकता था राज खत्म होने के बाद उसे कोसो दूर दुनिया के दूसरें हिस्से में बसे एक छोटे से समुद्री टापू पर भेज दिया जाता था. जहां उसे अपनी बाकी जिन्दगी बितानी होती थी. इससे राज्य में खुशहाली बनी रहती थी. हर किसी को नये राजा का इंतजार रहता था. राजा नया होता था तो उसकी सोंच भी नई होती थी. और राज्य के लोगों को नई नई बातें सिखने को मिलती थी. लेकिन जो राजा जाने वाला होता था. उसके लिए वह काले पानी कि सज़ा जैसी होती थी. इस साल भी राजा के जाने का वक़्त आया. तो उन्हें उस टापू पर पंहुचा दिया गया. वहां से लोटते वक़्त मंत्रियों को एक लड़का मिला. जिसका जहाज डूब गया था. वह कई दिनों तक समुद्र में जीवन और म्रत्यु के बीच तैरता रहा. मंत्रियों ने तय किया. कि इस बार का राजा उसे ही बनाया जाए. लड़के ने पहले मना किया. पर बाद में वह मान गया. राज्य में पहुँचने के बाद उसे वहां कि प्रथा के बारे में पता चला. इतने दिन समुद्र में अकेले रहने के बाद उस टापू पर जाना उसे भयावह ख्याल था....
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