प्रोफेसर शिरीन की कहानी , जिसने अपनी मृत बहन की डायरी का पाठ कर छात्रों को जीवन के लिए प्रेरित किया। उस दिन प्रोफेसर शिरीन कुछ अलग-सी दिख रही थीं। जब वह क्लास में आई , तो सन्नाटा छा गया। जो छात्र कभी चुप नहीं बैठते थे , वे भी प्रोफेसर को देख खामोश हो गए। प्रोफेसर बोलीं , आज मैं आपको कुछ पढ़कर सुनाऊंगी। उन्होंने पढ़ना शुरू किया , मैं बोलती कम , सुनती ज्यादा हूं , मैं अपने दोस्तों के बुलाने पर उनको कभी नहीं नकारती , अपने घर पर हफ्ते में कम से कम तीन दिन दोस्तों को पार्टी पर बुलाती हूं , मैं कागज के उन टुकड़ों पर कम ध्यान देती हूं , जो मेरे कमरे में बिस्तर के नीचे तुमने फेंक दिए थे , और तुम पर गुस्साने के बजाय तुमसे खूब सारी बातें करती हूं। मै दादाजी के साथ रोज शाम को सैर पर जाती और उनके अनुभवों से ढेर सारा सीखती हूं। मैं पापा के साथ स्कूटर पर बैठती हूं और यह नहीं सोचती कि मेरे बाल उड़ते हैं , या खराब होते हैं। मैं बस उस हवा को अपने बालों से तैरते हुए निकलते देखती और उस अनोखी गुदगुदी का आनंद लेती हूं। मैं कभी घास में बैठती हूं , कभी जमीन पर लोटती हूं। मैं रोज की तरह बिन...
Comments
Post a Comment